न्यूज मोहल्ला/नई दिल्ली:
पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव, खासकर ईरान, इजराइल और अमेरिका के बीच चल रहे संघर्ष का असर अब भारत के बाजारों में भी दिखाई देने लगा है। कच्चे तेल की कीमतों में उछाल और सप्लाई चेन में बाधा के कारण कई सेक्टर प्रभावित हुए हैं, जिससे निर्माण सामग्री, प्लास्टिक उत्पाद और रोजमर्रा की वस्तुओं के दाम बढ़ने लगे हैं।
PVC पाइप और हार्डवेयर में तेजी
बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, PVC (पॉलीविनाइल क्लोराइड) और अन्य पॉलिमर आधारित उत्पादों की कीमतों में हाल के दिनों में उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई है। PVC रेज़िन, जो पाइप और प्लास्टिक उत्पादों का मुख्य कच्चा माल है, उसकी कीमतों में तेजी आने से पाइप, फिटिंग्स, पानी की टंकियां और अन्य हार्डवेयर आइटम महंगे हो गए हैं। कई व्यापारियों का कहना है कि कीमतों में 10% से लेकर 30% तक की बढ़ोतरी देखी जा रही है।
पेट्रोलियम उत्पादों का असर
विशेषज्ञ बताते हैं कि मध्य पूर्व क्षेत्र में अस्थिरता के कारण कच्चे तेल की सप्लाई प्रभावित हो रही है, जिससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतें बढ़ी हैं। इसका सीधा असर भारत में डीज़ल, पेट्रोल और एलपीजी की लागत पर पड़ रहा है। ईंधन महंगा होने से ट्रांसपोर्ट लागत भी बढ़ी है, जिससे हर तरह के सामान की कीमत पर दबाव बना है।
पैकेजिंग और FMCG सेक्टर भी प्रभावित
प्लास्टिक और पॉलिमर महंगे होने का असर पैकेजिंग इंडस्ट्री पर भी पड़ा है। दूध, पानी, दवाइयों और अन्य पैक्ड सामान की पैकेजिंग लागत बढ़ने लगी है, जिससे आने वाले समय में उपभोक्ताओं को इन वस्तुओं के लिए ज्यादा कीमत चुकानी पड़ सकती है।
निर्माण क्षेत्र पर दबाव
कंस्ट्रक्शन सेक्टर में भी लागत बढ़ रही है। पाइप, केमिकल और अन्य निर्माण सामग्री महंगी होने से मकान निर्माण और इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स की लागत में इजाफा हो सकता है।
क्यों बढ़ रहे हैं दाम?
आर्थिक विशेषज्ञों के अनुसार इसके पीछे मुख्य कारण हैं:
- कच्चे तेल की कीमतों में उछाल
- होरमुज़ स्ट्रेट जैसे अहम समुद्री मार्गों में जोखिम
- पॉलिमर और रेज़िन की सप्लाई में कमी
- शिपिंग और इंश्योरेंस लागत में वृद्धि
- रुपये पर दबाव और आयात महंगा होना
आगे क्या?
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि पश्चिम एशिया में तनाव लंबा चलता है, तो भारत में महंगाई और बढ़ सकती है, खासकर निर्माण सामग्री, प्लास्टिक उत्पाद और रोजमर्रा की वस्तुओं में।
लब्बोलुआब:
ईरान-इजराइल तनाव का असर अब भारतीय बाजार तक पहुंच चुका है। फिलहाल सबसे ज्यादा प्रभाव प्लास्टिक, हार्डवेयर और ईंधन से जुड़े सेक्टर पर दिख रहा है, और आने वाले समय में इसका असर आम उपभोक्ताओं की जेब पर और गहरा हो सकता है।