भोपाल | न्यूज़ मोहल्ला रिपोर्ट

भोपाल शहर एक बार फिर शास्त्रीय संगीत की सुरमयी फिज़ाओं में डूबने जा रहा है। 29 मार्च 2026, रविवार को शाम 6 बजे, सरदार वल्लभ भाई पॉलिटेक्निक महाविद्यालय में एक भव्य महफ़िल-ए-मौसीकी का आयोजन किया जा रहा है।

यह आयोजन उस्ताद अब्दुल हलीम जाफ़र ख़ान सितार एंड संगीत अकादमी के तत्वावधान में होगा, जिसमें महान सितार वादक उस्ताद अब्दुल हलीम जाफ़र ख़ान को ख़िराज-ए-अक़ीदत पेश की जाएगी।

 कौन थे उस्ताद अब्दुल हलीम जाफ़र ख़ान?

भारतीय शास्त्रीय संगीत के महान सितार वादक उस्ताद अब्दुल हलीम जाफ़र ख़ान (1927–2017) ने अपनी अनूठी “जाफ़रखानी बाज़” शैली से संगीत जगत में एक अलग पहचान बनाई।

उन्हें उनके अद्वितीय योगदान के लिए

पद्म श्री (1970)

संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार (1987)

पद्म भूषण (2006)


जैसे प्रतिष्ठित सम्मानों से नवाज़ा गया।

 विरासत को आगे बढ़ा रहे हैं ज़ुनैन हलीम जाफ़र ख़ान

InShot_20260328_233855304.webp 155.75 KB
ज़ुनैन हलीम जाफ़र ख़ान

उनकी विरासत को आज उनके सुपुत्र ज़ुनैन हलीम जाफ़र ख़ान आगे बढ़ा रहे हैं, जो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रसिद्ध सितार वादक, शिक्षक और सांस्कृतिक दूत हैं।

वे “हलीम एकेडमी ऑफ़ सितार” के कार्यकारी निदेशक हैं और मुंबई में आयोजित “खिराज म्यूजिक फेस्टिवल” के आर्टिस्टिक डायरेक्टर भी हैं।

ज़ुनैन ख़ान ने अमेरिका, फ्रांस, दक्षिण कोरिया, चीन सहित कई देशों में प्रस्तुति देकर भारतीय संगीत को वैश्विक मंच पर पहचान दिलाई है।


कार्यक्रम की खास बातें

इस भव्य संगीत समारोह में देश के नामचीन कलाकार अपनी प्रस्तुतियों से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध करेंगे:

ख़ास पेशकश:

IMG-20260328-WA1304.jpg 439.15 KB
.

उमाकांत गुंदेचा (ध्रुपद गायन, पद्मश्री सम्मानित)


प्रमुख कलाकार:

उल्लास तेलंग (शास्त्रीय गायन)

जुनैद हलीम ख़ान (सितार, मुंबई)

रवि शंकर मिश्रा (बांसुरी, मैसूर)

डॉ. पृशाली पांडे (मुंबई)

सोनाली सातवलेकर (मुंबई)


संगतकार:

मनोज पाटीदार (तबला, भोपाल)

अजय कुलकर्णी (तबला, भोपाल)

मुन्नी मालवीय (हारमोनियम, भोपाल)


📅 कब और कहाँ?

🗓 तारीख: 29 मार्च 2026 (रविवार)

🕕 समय: शाम 6:00 बजे

स्थान: सरदार वल्लभ भाई पॉलिटेक्निक महाविद्यालय


सहयोग राशि: ₹100

📞 संपर्क: 9301986901

क्यों खास है यह आयोजन?

यह महफ़िल सिर्फ एक संगीत कार्यक्रम नहीं, बल्कि भारतीय शास्त्रीय संगीत की समृद्ध परंपरा, गुरु-शिष्य संबंध और सांस्कृतिक विरासत का जीवंत उत्सव है।

जहाँ एक ओर उस्ताद अब्दुल हलीम जाफ़र ख़ान को श्रद्धांजलि दी जाएगी, वहीं नई पीढ़ी के कलाकार उनकी विरासत को आगे बढ़ाते हुए संगीत की नई ऊँचाइयों को छूने का संदेश देंगे।


आखिर में...

भोपाल के संगीत प्रेमियों के लिए यह एक सुनहरा मौका है, जहाँ सुर, साधना और सम्मान—तीनों का अद्भुत संगम देखने को मिलेगा।

आपकी मौजूदगी इस महफ़िल की रौनक को और बढ़ाएगी… दिल से इंतज़ार रहेगा आपकी तशरीफ़ का।